कोलकाता:
पश्चिम बंगाल के विभिन्न अदालत परिसरों में काम कर रही महिला वकीलों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। हाल के दिनों में कई महिला वकीलों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अदालत परिसर के भीतर ही मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है, लेकिन शिकायत करने के बावजूद उन्हें उचित न्याय या समर्थन नहीं मिल पा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिला अदालतों से लेकर कोलकाता हाई कोर्ट तक, महिला वकीलों को असहज और असुरक्षित माहौल का सामना करना पड़ रहा है। कभी सहकर्मी वकीलों के व्यवहार को लेकर तो कभी अदालत कर्मचारियों की ओर से दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं। कई मामलों में पीड़ित महिलाएं डर या पेशेवर नुकसान की आशंका के कारण खुलकर शिकायत नहीं कर पातीं।
एक युवा महिला वकील ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,
“अदालत परिसर में ही ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जहां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं किया। शिकायत करने पर उल्टा परेशानी बढ़ने का डर रहता है।”
महिला वकीलों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद जांच प्रक्रिया बेहद धीमी होती है और कई बार प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने से अधिकारी कतराते हैं। इससे न्याय मिलने की उम्मीद और भी कम हो जाती है।
इस पूरे मामले को लेकर महिला वकीलों के संगठनों ने अदालत परिसरों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, एक स्वतंत्र और निष्पक्ष शिकायत समिति के गठन की भी अपील की गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब न्याय व्यवस्था से जुड़े लोग ही सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तो आम लोगों के लिए न्याय की अवधारणा भी कमजोर पड़ जाएगी। अब देखना होगा कि प्रशासन और न्यायिक संस्थाएं इस गंभीर मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाती हैं।