कोलकाता | 12 जनवरी 2026:
स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा की ओर से विशेष रूप से ‘विवेक यात्रा’ का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
भाजपा युवा मोर्चा की यह पदयात्रा हेदुआ क्षेत्र से शुरू होकर सिमला स्ट्रीट तक पहुंची। यात्रा के समापन पर स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। इस मौके पर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय राज्य मंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
भाजपा नेताओं का संदेश
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रनिर्माण में युवा शक्ति की भूमिका को समझने के लिए स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को आत्मसात करना आवश्यक है।
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी स्वामी विवेकानंद के सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं आज के दौर में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी श्रद्धांजलि
स्वामी विवेकानंद की जयंती पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी अलग कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य की मंत्री शशि पांजा सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने सिमला स्ट्रीट स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
तृणमूल नेताओं ने स्वामी विवेकानंद के मानवतावादी दृष्टिकोण, धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक समरसता के संदेश पर जोर दिया।
सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन
कार्यक्रमों को देखते हुए सिमला स्ट्रीट और आसपास के इलाकों में पुलिस की कड़ी व्यवस्था की गई थी। यातायात को नियंत्रित करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। पूरे आयोजन के दौरान माहौल शांतिपूर्ण रहा।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वामी विवेकानंद की जयंती पर विभिन्न दलों की सक्रियता आने वाले समय में युवाओं को जोड़ने की रणनीति का संकेत देती है। हालांकि, सभी दलों ने इस दिन स्वामी विवेकानंद के विचारों को सर्वोपरि बताते हुए श्रद्धांजलि दी।
निष्कर्ष
स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती पर कोलकाता में श्रद्धा, आदर्श और राजनीतिक सक्रियता का संगम देखने को मिला। उनके विचार आज भी समाज और राजनीति दोनों को दिशा देने का काम कर रहे हैं।