पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित 2016 एसएससी शिक्षक भर्ती घोटाले में एक बार फिर बड़ा खुलासा सामने आया है। हाल ही में एसएससी द्वारा सार्वजनिक की गई सीबीआई से संबंधित सूची ने इस पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। सूची के अनुसार, इस मामले की मुख्य याचिकाकर्ता लक्ष्मी तुंगा का नाम भी सीबीआई द्वारा चिन्हित ‘अयोग्य’ (टेंटेड) उम्मीदवारों में दर्ज है।
सीबीआई की जांच रिपोर्ट और वेटिंग लिस्ट के मुताबिक, लक्ष्मी तुंगा शिक्षाकर्मी पद के लिए वेटिंग लिस्ट में शामिल थीं। जांच के दौरान उन्हें अयोग्य उम्मीदवार बताया गया है। यह तथ्य सामने आते ही पूरे शिक्षक भर्ती मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
गौरतलब है कि लक्ष्मी तुंगा द्वारा दायर याचिका के आधार पर ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2016 की पूरी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का आदेश दिया था। इस फैसले के बाद हजारों शिक्षक और शिक्षाकर्मी अपनी नौकरी गंवा बैठे थे। अब जब यह सामने आया है कि याचिकाकर्ता स्वयं जांच एजेंसी की नजर में अयोग्य थीं, तो उस फैसले की पृष्ठभूमि और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
एसएससी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सीबीआई ने कुल 250 टेंटेड वेटिंग लिस्ट शिक्षक उम्मीदवारों और 1853 अयोग्य शिक्षाकर्मियों की पहचान की है। इस सूची के सार्वजनिक होने के बाद शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया है।
राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस खुलासे से पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि मामला अदालत में विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि याचिकाकर्ता की भूमिका जांच में विवादित साबित होती है, तो भविष्य में इस मामले में नए कानूनी पहलुओं पर सुनवाई की मांग उठ सकती है। साथ ही, नौकरी गंवाने वाले योग्य उम्मीदवारों के भविष्य और अधिकारों को लेकर भी नई बहस छिड़ने की संभावना है।
फिलहाल, एसएससी शिक्षक भर्ती घोटाले में यह नया खुलासा मामले को और जटिल बना रहा है। अब सबकी नजर अदालत, जांच एजेंसियों और राज्य प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।