दक्षिण कोलकाता के बाघाजतिन रेलवे स्टेशन परिसर में आज सुबह उस समय हलचल मच गई, जब स्टेशन की दीवारों पर रेलवे प्रशासन की ओर से एक अहम नोटिस चिपका हुआ देखा गया। इस नोटिस में स्टेशन से सटे एक ढांचे को अनधिकृत (अवैध) निर्माण बताते हुए उसे तय समयसीमा के भीतर खाली करने का निर्देश दिया गया है।
नोटिस के अनुसार, संबंधित अनधिकृत संरचना को 28 जनवरी 2026 तक पूरी तरह खाली करना अनिवार्य है। रेलवे ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि इस तारीख के बाद यदि किसी प्रकार की संपत्ति को नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की नहीं होगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि समयसीमा समाप्त होने के बाद रेलवे दिशानिर्देशों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह नोटिस पूर्वी रेलवे (Eastern Railway), सियालदह डिवीजन की ओर से जारी किया गया है। नोटिस अंग्रेज़ी और बंगाली—दोनों भाषाओं में लिखा गया है, ताकि स्थानीय लोग इसे आसानी से समझ सकें। हालांकि नोटिस में किसी व्यक्ति या दुकान का नाम स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है, लेकिन “यह संरचना अनधिकृत है”—यह बात साफ शब्दों में दर्ज है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बाघाजतिन रेलवे स्टेशन और उसके आसपास लंबे समय से कुछ अस्थायी दुकानें, शेड और ढांचे मौजूद हैं। यात्रियों का एक वर्ग पहले से ही इन निर्माणों को लेकर असुविधा और सुरक्षा से जुड़ी शिकायत करता रहा है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा, स्टेशन के सुचारु संचालन और भविष्य की विकास योजनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
हालांकि इस नोटिस के बाद स्थानीय स्तर पर चिंता भी देखने को मिल रही है। कई छोटे दुकानदारों और व्यवसायियों को आशंका है कि उच्छेदन अभियान शुरू होने पर उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। कुछ स्थानीय निवासियों का कहना है कि कार्रवाई से पहले रेलवे प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन-किन ढांचों पर इसका असर पड़ेगा और क्या किसी प्रकार का वैकल्पिक या पुनर्वास इंतजाम किया जाएगा।
रेलवे की ओर से फिलहाल इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन नोटिस की भाषा से साफ है कि प्रशासन इस मामले में सख्त रुख अपनाने के मूड में है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई स्टेशन के आसपास अवैध अतिक्रमण हटाने और बुनियादी ढांचे के सुधार की व्यापक योजना का हिस्सा हो सकती है।
अब सबकी निगाहें 28 जनवरी 2026 पर टिकी हैं। देखना होगा कि निर्धारित समयसीमा के भीतर स्थिति कैसे बदलती है और रेलवे प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।