हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee ने राज्य सरकार की प्रमुख महिला कल्याण योजना लक्ष्मी भंडार को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह योजना कोई दान नहीं है, बल्कि राज्य की महिलाओं का अधिकार है। उन्होंने यह भी दावा किया कि किसी भी राजनीतिक दबाव के बावजूद इस योजना को बंद नहीं किया जा सकता।
कल्याण योजनाओं पर सियासत
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं से लाखों महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं और उनके परिवारों को स्थिरता मिली है। पार्टी का दावा है कि यह योजनाएं सामाजिक विकास की रीढ़ हैं और इन्हें राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।
वहीं, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर वित्तीय अनुशासन को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस तरह की योजनाओं से राज्य की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और पारदर्शिता की भी कमी है।
सुरक्षा को लेकर केंद्र की चिंता
दूसरी ओर, एक राजनीतिक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ जैसे विषयों पर राज्य सरकार को और गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई। शासक दल ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक कारणों से राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए कल्याणकारी योजनाएं और सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख चुनावी हथियार बनते जा रहे हैं। एक ओर जहां सरकार सामाजिक योजनाओं के जरिए जनसमर्थन मजबूत करना चाहती है, वहीं विपक्ष प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों को उठाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
आगे क्या?
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल आने वाले दिनों में और गर्म हो सकता है। कल्याणकारी योजनाओं का भविष्य, केंद्र–राज्य संबंध और सुरक्षा से जुड़े सवाल—ये सभी मुद्दे राज्य की राजनीति के केंद्र में बने रहने की संभावना है।