नई दिल्ली:
देश में सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने ट्रैफिक नियमों को और सख्त कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत अब यदि कोई वाहन चालक एक वर्ष के भीतर पांच बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित या पूरी तरह रद्द किया जा सकता है। इस फैसले का उद्देश्य बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों पर लगाम कसना और सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को कम करना है।
परिवहन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, अब तक अधिकतर मामलों में ट्रैफिक उल्लंघन पर केवल जुर्माना लगाया जाता था, लेकिन नए नियमों में आदतन नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने का प्रावधान जोड़ा गया है। सरकार का मानना है कि सिर्फ चालान से डर नहीं बन पा रहा था, इसलिए लाइसेंस से जुड़ी सख्ती जरूरी हो गई थी।
किन उल्लंघनों को गिना जाएगा?
नए नियम के तहत कई सामान्य लेकिन खतरनाक ट्रैफिक गलतियों को उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है। इनमें शामिल हैं—
रेड लाइट जंप करना
तेज रफ्तार से वाहन चलाना
हेलमेट या सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करना
मोबाइल फोन पर बात करते हुए ड्राइविंग
गलत जगह पार्किंग
ट्रैफिक नियमों की अनदेखी से जुड़ी अन्य ई-चालान प्रविष्टियां
यदि ऐसे उल्लंघन एक साल में पांच बार दर्ज हो जाते हैं, तो चालक को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
लाइसेंस रद्द करने से पहले क्या होगा?
परिवहन विभाग ने साफ किया है कि लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करने से पहले संबंधित चालक को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। ई-चालान रिकॉर्ड और ट्रैफिक उल्लंघनों की जांच के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। यानी बिना जांच-पड़ताल के किसी का लाइसेंस सीधे रद्द नहीं किया जाएगा।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में सड़क हादसों की एक बड़ी वजह ट्रैफिक नियमों का पालन न करना है। खासकर शहरी इलाकों में ओवरस्पीडिंग और सिग्नल तोड़ने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि सख्त नियमों से चालकों में जिम्मेदारी की भावना आएगी और सड़क सुरक्षा बेहतर होगी।
लोगों और विशेषज्ञों की राय
कई नागरिकों और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि आदतन नियम तोड़ने वालों के लिए यह कदम जरूरी था। हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि ई-चालान सिस्टम में पारदर्शिता और सुधार जरूरी है, ताकि किसी निर्दोष चालक को परेशानी न हो।
कुल मिलाकर, ट्रैफिक नियमों में यह बदलाव सड़क सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि सख्ती के बाद सड़कों पर अनुशासन कितना बढ़ता है।