नई दिल्ली:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल 2026 की शुरुआत में एक अहम ग्रह स्थिति बनने जा रही है, जो कई राशियों के जीवन को प्रभावित कर सकती है। सूर्य और राहु की युति से ग्रहण योग का निर्माण होगा। यह योग कुंभ राशि में बनेगा और इसे ज्योतिष की दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब सूर्य जैसे तेजस्वी ग्रह का मेल राहु जैसी छाया ग्रह से होता है, तब व्यक्ति के जीवन में भ्रम, मानसिक दबाव और निर्णयों में अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि इसका असर सभी राशियों पर समान नहीं होगा।
क्या है ग्रहण योग?
वैदिक ज्योतिष में सूर्य और राहु की युति को ग्रहण योग कहा जाता है। यह वास्तविक सूर्य ग्रहण नहीं होता, लेकिन इसका प्रभाव मानसिक और व्यवहारिक स्तर पर देखा जाता है। सूर्य आत्मबल, नेतृत्व और आत्मविश्वास का कारक है, जबकि राहु अचानक परिवर्तन, भ्रम और भटकाव से जुड़ा माना जाता है। दोनों की युति से व्यक्ति की सोच और निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।
किन राशियों को रहना होगा सतर्क?
ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, इस ग्रहण योग का प्रभाव कुछ राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है।
कर्क राशि:
इस राशि के जातकों के लिए यह समय भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पारिवारिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी चिंता और मानसिक दबाव बढ़ने की संभावना है। किसी भी बात पर जल्द प्रतिक्रिया देने से बचने की सलाह दी जाती है।
कन्या राशि:
कन्या राशि वालों को विशेष रूप से कार्यक्षेत्र और आर्थिक मामलों में सतर्क रहना होगा। निवेश, कानूनी दस्तावेज या बड़े फैसलों में जल्दबाजी नुकसानदायक साबित हो सकती है। सहयोगियों से मतभेद की स्थिति भी बन सकती है।
मीन राशि:
मीन राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण योग खर्च बढ़ने और मन की बेचैनी का कारण बन सकता है। रिश्तों में गलतफहमी और आत्मविश्वास की कमी महसूस हो सकती है। इस समय धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा।
क्या सभी के लिए नकारात्मक है यह योग?
ज्योतिषाचार्य यह भी स्पष्ट करते हैं कि ग्रहण योग का प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली पर निर्भर करता है। जिन लोगों की कुंडली में शुभ ग्रहों की स्थिति मजबूत है, उन्हें इस योग का प्रभाव कम महसूस हो सकता है। इसलिए केवल राशि के आधार पर निष्कर्ष निकालना सही नहीं माना जाता।
ज्योतिषियों की सलाह
इस अवधि में जल्दबाजी से बचना, स्वास्थ्य पर ध्यान देना और मानसिक संतुलन बनाए रखना सबसे अहम बताया जा रहा है। योग, ध्यान और सकारात्मक सोच से इस समय के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सावधानी ही है सबसे बड़ा उपाय
ग्रहण योग को डर का कारण नहीं बल्कि चेतावनी के रूप में देखने की सलाह दी जाती है। सही सोच, संयम और समझदारी से यह समय भी सहज रूप से पार किया जा सकता है।