गणित का डर खत्म करने की पहल, बसीरहाट के स्कूल में शुरू हुई आधुनिक “मैथ लैब”

उत्तर 24 परगना | SENews विशेष रिपोर्ट

गणित को लेकर बच्चों के मन में बैठा डर अब धीरे-धीरे खत्म होने की दिशा में है। उत्तर 24 परगना के बसीरहाट इलाके के एक ग्रामीण स्कूल ने पढ़ाई को रोचक और व्यवहारिक बनाने के उद्देश्य से एक आधुनिक मैथमैटिक्स लैब (गणित प्रयोगशाला) की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को “Learn With Fun” यानी आनंद के साथ सीखने का अवसर देना है।

कहां शुरू हुई यह पहल?

बसीरहाट महकमे के बदुरिया ब्लॉक अंतर्गत कातियाहाट क्षेत्र के एक स्कूल में हाल ही में इस मैथ लैब का उद्घाटन किया गया। ग्रामीण इलाके के स्कूल में इस तरह की आधुनिक व्यवस्था शुरू होने से न सिर्फ छात्र-छात्राएं, बल्कि शिक्षक और अभिभावक भी काफी उत्साहित हैं।

कैसे बदलेगी गणित पढ़ने की सोच?

अब तक अधिकतर स्कूलों में गणित सिर्फ किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित था। लेकिन इस मैथ लैब में छात्र—

ज्यामितीय आकृतियों के मॉडल

संख्या और मापन से जुड़े उपकरण

खेल और गतिविधियों के माध्यम से सीखने की सामग्री

हाथों से प्रयोग करने वाले शैक्षणिक साधन

का उपयोग करके गणित को समझ पाएंगे। इससे कठिन विषय भी आसान लगेंगे और बच्चों की समझ बढ़ेगी।

शिक्षकों का क्या कहना है?

शिक्षकों के अनुसार, गणित में कमजोरी का सबसे बड़ा कारण डर और रुचि की कमी है। जब बच्चे खुद प्रयोग करके सीखते हैं, तो सवाल पूछने और गलतियां करने से नहीं घबराते। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और गणित को लेकर सकारात्मक सोच विकसित होती है।

सहयोग से हुआ संभव

इस मैथ लैब को तैयार करने में स्कूल के पूर्व छात्रों और एक सेवानिवृत्त शिक्षक का विशेष योगदान रहा है। उनके आर्थिक और नैतिक सहयोग से ही इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका। स्कूल प्रशासन ने समाज के इस सहयोग के लिए आभार जताया है।

छात्रों में दिख रहा उत्साह

मैथ लैब शुरू होने के बाद छात्रों के बीच अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। कई बच्चों ने बताया कि जो गणित पहले डरावना लगता था, अब वही विषय सबसे ज्यादा पसंदीदा बन गया है।

भविष्य की योजना

स्कूल प्रबंधन का कहना है कि आने वाले समय में विज्ञान और तकनीक से जुड़े अन्य प्रयोगशालाएं भी शुरू करने की योजना है। साथ ही, इस मैथ लैब की सफलता से प्रेरणा लेकर आसपास के अन्य स्कूल भी ऐसे मॉडल अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

निष्कर्ष

बसीरहाट के इस स्कूल की पहल यह साबित करती है कि अगर सही सोच और सामूहिक प्रयास हो, तो ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। गणित को डर से निकालकर आनंद का विषय बनाने की यह कोशिश भविष्य में कई बच्चों का आत्मविश्वास और शैक्षणिक स्तर दोनों ऊंचा करेगी।

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