कोलकाता | SENews विशेष रिपोर्ट:
रेलवे स्टेशन और ट्रेनों की भीड़ में कई बार ऐसे लोग फंस जाते हैं, जिन्हें तत्काल मदद की ज़रूरत होती है। खासकर नाबालिग बच्चे और असहाय यात्री सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। हाल ही में उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे (Northeast Frontier Railway) ने ऐसी ही एक सराहनीय और मानवीय पहल करते हुए विभिन्न स्टेशनों से 8 नाबालिगों सहित कुल 12 असहाय यात्रियों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया।
कई स्टेशनों पर चला विशेष अभियान
रेलवे सूत्रों के अनुसार, जनवरी के अंतिम सप्ताह में नियमित निगरानी के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और संबंधित विभागों ने कई संदिग्ध और असहाय यात्रियों को चिन्हित किया। यह अभियान उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे के अंतर्गत आने वाले कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर चलाया गया, जिनमें फालाकाटा, लामडिंग, किशनगंज, रंगिया, न्यू बोंगाईगांव, कामाख्या, कटिहार और गुवाहाटी जैसे स्टेशन शामिल हैं।
किन परिस्थितियों में मिले यात्री
बचाए गए यात्रियों में अधिकांश नाबालिग बच्चे थे, जो बिना किसी अभिभावक के अकेले यात्रा कर रहे थे या स्टेशन परिसर में भटके हुए मिले। कुछ बच्चों को अपनी मंज़िल के बारे में स्पष्ट जानकारी भी नहीं थी। इसके अलावा कुछ वयस्क यात्री भी ऐसे पाए गए, जो शारीरिक या मानसिक रूप से असहाय स्थिति में थे और उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता थी।
बचाव के बाद क्या हुआ
रेस्क्यू के तुरंत बाद सभी यात्रियों को प्राथमिक देखभाल और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया।
नाबालिग बच्चों को नियमानुसार चाइल्ड लाइन और अधिकृत बाल देखभाल संस्थानों को सौंप दिया गया।
वहीं, वयस्क यात्रियों को स्थानीय पुलिस प्रशासन के हवाले किया गया, ताकि उनकी पहचान सुनिश्चित कर आगे की आवश्यक कानूनी और मानवीय कार्रवाई की जा सके।
रेलवे का बयान
उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा और कल्याण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विशेष रूप से बच्चों और कमजोर वर्ग के यात्रियों के लिए RPF कर्मियों को संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का प्रशिक्षण दिया जाता है। रेलवे ने आम यात्रियों से भी अपील की है कि यदि वे किसी स्टेशन या ट्रेन में किसी नाबालिग या असहाय व्यक्ति को अकेले या संदिग्ध स्थिति में देखें, तो तुरंत रेलवे सुरक्षा बल को सूचना दें।
समाज के लिए संदेश
रेलवे की इस कार्रवाई को केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी का उदाहरण माना जा रहा है। भीड़भाड़ वाले रेलवे नेटवर्क में ऐसे प्रयास यह साबित करते हैं कि समय पर उठाया गया एक कदम कई ज़िंदगियों को सुरक्षित भविष्य दे सकता है।
निष्कर्ष
उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे की यह पहल दिखाती है कि रेलवे केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर समाज के सबसे कमजोर लोगों के लिए सुरक्षा कवच भी बन सकता है। भविष्य में ऐसे प्रयास और अधिक मजबूत हों, यही उम्मीद की जा रही है।