17 फरवरी 2026, कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय बेरोजगारी, शिक्षक नियुक्ति और ‘युवा साथी’ योजना को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। एक ओर शिक्षित बेरोजगार युवाओं का आंदोलन जारी है, तो दूसरी ओर राज्य सरकार की नई आर्थिक सहायता योजना पर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है।
‘युवा साथी’ योजना पर जोर
राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने हाल ही में ‘युवा साथी’ योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह सहायता युवाओं को तब तक दी जाएगी जब तक उन्हें रोजगार नहीं मिल जाता या अधिकतम पांच वर्षों तक।
सूत्रों के अनुसार, पहले इस योजना को अगस्त में शुरू करने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे 1 अप्रैल से लागू करने का निर्णय लिया गया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कैंप लगाकर आवेदन पत्र वितरित किए जा रहे हैं और बड़ी संख्या में युवा इसमें आवेदन कर रहे हैं।
हालांकि कई आवेदकों का कहना है कि आर्थिक सहायता से अस्थायी राहत तो मिल सकती है, लेकिन स्थायी समाधान केवल रोजगार सृजन ही है। उनका आरोप है कि डिग्री और प्रशिक्षण होने के बावजूद उन्हें लंबे समय से नौकरी नहीं मिल पा रही है।
अपर प्राइमरी नियुक्ति को लेकर आंदोलन
इसी बीच अपर प्राइमरी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी विवाद जारी है। कोलकाता में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने धरना-प्रदर्शन किया और नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि कानूनी जटिलताओं और कथित अनियमितताओं के कारण उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। उन्होंने मेरिट सूची शीघ्र प्रकाशित कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है।
प्रशासनिक कार्रवाई और सियासत
भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवाद के बीच चुनाव आयोग द्वारा कुछ एईआरओ (AERO) अधिकारियों को निलंबित किए जाने की खबर भी सामने आई है। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। सत्तारूढ़ दल ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं, जबकि विपक्ष इसे अनियमितताओं के खिलाफ जरूरी कार्रवाई बता रहा है।
विपक्ष का हमला
राज्य के नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari ने ‘युवा साथी’ योजना को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यह योजना रोजगार देने के बजाय भत्ता देकर युवाओं को शांत करने की कोशिश है। उन्होंने इसे आगामी चुनावों से पहले वोट बैंक की राजनीति करार दिया।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के प्रस्तावित बंगाल दौरे और प्रधानमंत्री Narendra Modi की संभावित सभा को लेकर भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। भाजपा का दावा है कि वह बेरोजगारी और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार का कहना है कि वह युवाओं के हित में लगातार कदम उठा रही है। ‘युवा साथी’ योजना को अंतरिम राहत के रूप में पेश किया गया है, ताकि नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को आर्थिक सहयोग मिल सके। सरकार ने यह भी दावा किया है कि राज्य में निवेश बढ़ाने और नए रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
आगे की राह
बेरोजगारी, शिक्षक नियुक्ति और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे मुद्दों ने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच बेरोजगार युवाओं को ठोस समाधान कब और कैसे मिलता है। फिलहाल, ‘युवा साथी’ योजना राहत और विवाद—दोनों का केंद्र बनी हुई है।