राजस्थान के दौसा जिले से एक बेहद दुखद व हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। चार वर्षीय बच्चा प्रिंस (जिसे घर में टिल्लू कहा जाता था) 2020 में अचानक अपने घर से लापता हो गया था। छह साल बाद अब पुलिस को संदेह है कि बच्चे की हत्या करके शव को निर्माणाधीन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के नीचे गाड़ दिया गया था। यह खुलासा इलाके में सनसनी फैल गया है और पूरे मामले की जांच तेज़ी से जारी है।
📌 2020 में अचानक लापता हुआ बच्चा
16 अगस्त 2020 को दौसा के एक गाँव उनबड़ा में खेलते समय प्रिंस अचानक लापता हो गया था। उसके गायब होने के बाद परिवार और स्थानीय लोग उसकी खोजबीन में जुटे, लेकिन किसी तरह का कोई सुराग नहीं मिला। उसके लापता होने के तुरंत बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, लेकिन लम्बे समय तक कोई सफलता नहीं मिली थी।
छह साल तक लगातार खोजबीन और आशा के बावजूद प्रिंस की कोई खबर नहीं आई, जिससे परिजन निराश हो गए थे, और मामला ठंडा पड़ता चला गया।
🕵️♂️ नई जांच में हत्या का शक
हाल ही में पुलिस को कुछ नए सबूत और साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर जांच टीम ने बच्चे के लापता होने के पीछे हत्या का मामला संदेह के दायरे में रखा। शुरुआती जांच में पता चला कि बच्चे के काका अनिल और काकी कृष्णा के बीच किसी पारिवारिक मतभेद के कारण विवाद उत्पन्न हुआ था। जांच अधिकारियों का मानना है कि उसी दिन बच्चे की हत्या कर दी गई थी।
खानापूरी करने के बजाय दोनों आरोपी बच्चे का शव गृह में कुछ दिनों तक छिपाकर रखते थे और फिर निर्माणाधीन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के समीप मिट्टी में दफन कर दिया था।
😱 चौंकाने वाली बात — आरोपियों ने ही खोज में भाग গ্রহণ
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बच्चे के लापता होने के दौरान और बाद में अनिल और कृष्णा खुद शोध कार्य में शामिल थे। वे परिवार के साथ ही रह रहे थे, और बच्चा ढूँढ़ने के लिए लगाई गई कोशिशों में भाग ले रहे थे। इससे किसी को भी उन पर शक नहीं हुआ, और यह रहस्य छह वर्षों तक छुपा रहा।
🚜 खुदाई में सामने आया शक
बच्चे के शव की खोज हेतु पुलिस ने ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) मशीन का उपयोग किया, जिससे मिट्टी के नीचे असामान्य संरचना का पता चला। इस संकेत के आधार पर जेसिबি मशीनों, खुदाई टीमों और तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता लेकर गहराई तक खोदाई की जा रही है। जांच में अनुमान है कि शव लगभग 30 फीट (करीब 9 मीटर) की गहराई पर हो सकता है।
हालांकि अब तक खुदाई के बावजूद बच्चे का शव नहीं मिला है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वे हर दिशा से तलाश जारी रखेंगे और किसी भी अहम सबूत को नजरअंदाज नहीं करेंगे।
👨👩👦 परिवार की अपील
जब बच्चा गायब हुआ था, तब प्रिंस का परिवार बेहद टूट चुका था। बच्चे के पिता जगमोहन बैरवा, जो दुबई में कार्यरत थे, हाल ही में 21 फरवरी को भारत लौटे, ताकि वे जांच प्रक्रिया को करीब से देख सकें। उन्होंने मीडिया से कहा कि वे बच्चे का शव चाहे किसी भी हालत में मिले, वे उसकी देह को अंतिम बार देखने और हत्या के दोषियों को सज़ा दिलाने की लड़ाई लड़ना चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले छह वर्षों में उन्होंने लगभग ₹10 लाख रुपये खर्च कर बच्चे की खोज की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। उनका केवल एक ही उद्देश्य है — “प्रिंस की देह का अंतिम संस्कार और न्याय”।
🚓 पुलिस की कार्यवाही
पुलिस ने अनिल और कृष्णा को गिरफ्तार कर लिया है और अब उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच अधिकारियों ने बताया है कि पूछताछ जारी है और तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहायता से हर संभावित पहलू की पड़ताल हो रही है।
यह मामला केवल एक बाल हत्याकांड नहीं है, बल्कि यह विश्वासघাত, परिवार के भीतर छुपা अपराध और वर्षों चली निराशा की कहानी भी है। छह वर्ष बाद इस रहस्य के उघड़ने से एक ओर जहां परिवार को थोड़ी राहत मिली है, वहीं पूरे समाज में न्याय के प्रति उम्मीद भी जगी है।