मध्यप्राच्य का तनाव एक बार फिर गंभीर रूप से बढ़ गया है। United States ने घोषणा की है कि उसने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्यालय सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमले किए हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस हमले के माध्यम से उसने “साँप के सिर को काट दिया” — उनका मतलब है, ईरानी सैन्य नेतृत्व और उनकी मौजूदा कमान प्रणाली को कमजोर करना।
🌍 अमेरिकी हमले का पैमाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि IRGC का मुख्यालय अब अस्तित्व में नहीं है और इस हमले में संगठन की क्षमता को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचाई गई है। अमेरिकी पक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले 47 वर्षों में IRGC ने सैकड़ों अमेरिकी नागरिकों और सैन्य कर्मियों की मौत का कारण बना है — इसी का जवाबी कार्रवाई के तौर पर यह हमला किया गया।
यूएस और उसके सहयोगी बलों ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान की कई बैलिस्टिक मिसाइल साइटों, रक्षा नेटवर्क और कमान केंद्रों को निशाना बनाया है, जिसमें अत्याधुनिक B-2 स्टील्थ बमबाज़ विमानों का भी इस्तेमाल शामिल रहा है।
🇮🇷 ईरान की प्रतिक्रिया और प्रतिशोध
तेहरान ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान और सुरक्षा का बचाव करेगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्वीकार किया कि कमान ढांचा प्रभावित हुआ है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की सेनाएँ “स्वतंत्र और अलग-अलग निर्देशों के साथ कार्य कर रही हैं।” ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी एवं इजरायली ठिकानों को “वैध लक्ष्य” बताते हुए जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले भी शुरू कर दिए हैं।
कई स्रोतों के अनुसार ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और कतर स्थित अमेरिकी बेसों पर मिसाइलों और वेपन सिस्टम से कई हमले किए हैं, जिसमें सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन उपयोग में लाए गए हैं।
☠️ मानव और सैन्य क्षति
इस महारुपी संघर्ष में निशाना साधते हुए ईरान तथा उसके सहयोगी बलों ने व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। कई रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया है कि ईरान के जवाबी हमलों में कुछ अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और कई घायल भी हुए हैं।
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार अब तक दोनों पक्षों के बीच हुए हमलों में ईरान के 24 से अधिक प्रांतों में नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है, जिसमें 200 से अधिक लोगों की मौत और दर्जनों घायल होने की पुष्टि हुई है।
🌐 क्षेत्रीय एवं वैश्विक असर
मध्यपूर्व में जारी इस संघर्ष ने पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना दिया है। तेल और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है, विमान उड़ानों पर प्रतिबंध और बाधाएँ बढ़ रही हैं, जबकि कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षा सलाह दी है।
📌 निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह संघर्ष अब पारम्परिक युद्ध की सीमाएँ पार कर गया है और इसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दुनिया भर में दिख रहा है। दोनों पक्षों के हमले और जवाबी कार्रवाई के बीच मध्यपूर्व एक तनावपूर्ण युद्धक्षेत्र में बदल चुका है, जिसका असर आगे भी कई महीनों तक महसूस हो सकता है।