खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर? आधिकारिक घोषणा का इंतजार

मध्य-पूर्व की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के निधन के बाद उनके बेटे Mojtaba Khamenei को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। हालांकि, तेहरान की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
कैसे होता है सुप्रीम लीडर का चयन?
ईरान के संविधान के अनुसार, देश के सर्वोच्च नेता का चयन एक विशेष धार्मिक निकाय — Assembly of Experts — द्वारा किया जाता है। यह परिषद वरिष्ठ धर्मगुरुओं से मिलकर बनी होती है और सुप्रीम लीडर की नियुक्ति तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे हटाने का अधिकार भी रखती है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुई एक आपात बैठक में परिषद के अधिकांश सदस्यों ने मोजतबा खामेनेई के नाम पर सहमति जताई। बताया जा रहा है कि देश की मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए जल्द निर्णय लिया गया।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
1969 में जन्मे मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान की सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली माने जाते रहे हैं। वे धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और देश की शक्तिशाली सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के साथ उनके करीबी संबंध होने की चर्चा रही है।
हालांकि उन्होंने कभी कोई प्रमुख निर्वाचित पद नहीं संभाला, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पर्दे के पीछे नीतिगत फैसलों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
उठ रहे हैं सवाल
ईरान में सत्ता का हस्तांतरण पारिवारिक परंपरा के आधार पर नहीं होता। ऐसे में पिता के बाद बेटे का सर्वोच्च पद पर आना कई सवाल खड़े कर रहा है। कुछ विशेषज्ञ इसे ईरान की राजनीतिक संरचना में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि मौजूदा संकट के दौर में निरंतरता और मजबूत नेतृत्व आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
यदि मोजतबा खामेनेई आधिकारिक रूप से सुप्रीम लीडर बनते हैं, तो इसका असर ईरान की विदेश नीति पर भी पड़ सकता है। परमाणु कार्यक्रम, पश्चिमी देशों के साथ संबंध, और क्षेत्रीय राजनीति — इन सभी मुद्दों पर नई दिशा देखने को मिल सकती है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर तेहरान पर टिकी है। आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। तब तक यह खबर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

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