पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले ही Bharatiya Janata Party ने चुनाव की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण मांग उठाई है। पार्टी ने कहा है कि राज्य में विधानसभा चुनाव 7-8 चरणों में कराने के बजाय केवल 1 या 2 चरणों में ही पूरा कराया जाए।
इस मांग को लेकर भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में Election Commission of India के फुल बेंच के साथ बैठक की। इस बैठक में पार्टी के नेताओं ने चुनाव को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए कई सुझाव भी रखे।
भाजपा नेताओं के अनुसार, कम चरणों में चुनाव कराए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था को संभालना आसान होगा और सुरक्षा बलों की तैनाती भी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। पार्टी का कहना है कि लंबे समय तक कई चरणों में चुनाव होने से राजनीतिक तनाव और टकराव की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए कम समय में चुनाव प्रक्रिया पूरी करना बेहतर होगा।
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग के साथ हुई बैठक में भाजपा की ओर से करीब 16 मांगें रखी गईं। इनमें सबसे प्रमुख मांग चुनाव को कम चरणों में कराने की रही। इसके अलावा पार्टी ने राज्य के संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी बात कही।
भाजपा नेताओं ने राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को डर और हिंसा से मुक्त माहौल मिलना चाहिए। इसके लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मांग इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने कई चरणों में चुनाव कराने का समर्थन किया था। उस समय पार्टी का तर्क था कि कई चरणों में मतदान होने से केंद्रीय बलों को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात करना आसान हो जाता है और चुनाव अधिक सुरक्षित तरीके से कराया जा सकता है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव का काफी महत्व होता है। राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 148 सीटों की जरूरत होती है। फिलहाल राज्य में All India Trinamool Congress की सरकार है और मुख्यमंत्री के रूप में Mamata Banerjee नेतृत्व कर रही हैं।
इधर चुनाव आयोग की टीम पश्चिम बंगाल के दौरे पर है और प्रशासनिक अधिकारियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रही है। इन बैठकों में चुनाव की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग सभी दलों की राय सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय करेगा कि चुनाव कितने चरणों में कराए जाएंगे। आमतौर पर सुरक्षा स्थिति, केंद्रीय बलों की उपलब्धता और प्रशासनिक तैयारियों को ध्यान में रखते हुए ही चुनाव के चरण तय किए जाते हैं।
फिलहाल भाजपा की इस मांग के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। अब सबकी नजर चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी है कि वह पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव को कितने चरणों में कराने का निर्णय लेता है।