जेल में प्यार: दो हत्या के दोषियों ने परोल पर शादी की

अलवर, राजस्थान:
राजस्थान के अलवर जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। दो ऐसे व्यक्ति, जो हत्या के आरोप में जेल की सजा काट रहे थे, जेल में मिलने के दौरान एक-दूसरे के प्रेम में पड़ गए और हाल ही में परोल मिलने के बाद शादी कर ली। यह घटना राज्य और देश में चर्चा का विषय बन गई है।

जेल में जन्मा प्रेम

प्रिया सेठ और हनुमान प्रसाद नामक यह जोड़ा अलग-अलग हत्या के मामलों में जीवनभर की सजा काट रहा था। दोनों की मुलाकात जिले के एक खुले जेल परिसर में हुई, जहाँ सामान्य जेलों की तुलना में कैदियों को अधिक स्वतंत्रता दी जाती है। इसी खुले वातावरण में उन्होंने एक-दूसरे को करीब से जाना और प्रेम संबंध स्थापित हो गया।

उनके अपराध क्या थे?

प्रिया सेठ 2018 में हुए एक हाई-प्रोफाइल मामले में दोषी पाई गई थी। आरोप है कि उसने डेटिंग ऐप के जरिए एक व्यक्ति को फंसाया, हत्या की और शव छिपा दिया।

हनुमान प्रसाद अलवर के एक अन्य मामले में दोषी थे, जिसमें उन्होंने एक व्यक्ति और उसके चार बच्चों की हत्या की थी।

परोल पर शादी का निर्णय

जेल में कुछ महीने साथ रहने के बाद दोनों ने परिवार की सहमति लेकर शादी का निर्णय लिया। उन्होंने परोल के लिए आवेदन किया, जिसे राजस्थान हाई कोर्ट के निर्देश पर परोल कमिटी ने मंजूरी दे दी। कमिटी ने दोनों को 15 दिन की परोल अवधि दी, ताकि वे अलवर में अपनी शादी संपन्न कर सकें।

गोपनीय और सादगीपूर्ण समारोह

शादी का आयोजन पूरी तरह गोपनीय रखा गया। केवल परिवार के करीबी सदस्य ही मौजूद थे। शादी हिंदू परंपरा और रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न की गई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, समारोह को मीडिया और जनता की नजरों से दूर रखा गया ताकि किसी प्रकार का विवाद न उत्पन्न हो।

प्रतिक्रियाएं और सुरक्षा

स्थानीय पुलिस सूत्रों ने बताया, “हालांकि ये दोनों हत्या के दोषी हैं, परोल की शर्तों का पालन करते हुए उन्हें थोड़े समय के लिए बाहर आने की अनुमति मिली है। हम उनकी सुरक्षा और नियमों के पालन पर नजर रख रहे हैं।”

समाज में इस घटना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ लोग इसे अद्भुत और असामान्य कहानी मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस पर कानूनी और नैतिक प्रश्न उठा रहे हैं।

निष्कर्ष

जेल में प्यार और परोल पर शादी करने वाले दो हत्या के दोषियों की यह कहानी निश्चित रूप से अनोखी और दुर्लभ घटना के रूप में इतिहास में दर्ज होगी। यह दिखाता है कि मनुष्य की भावनाएं कठोर परिस्थितियों में भी विकसित हो सकती हैं।

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