88 वर्ष की उम्र में पद्मश्री सम्मान: पूर्व IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू की प्रेरणादायक कहानी

नई दिल्ली/चंडीगढ़:
देश में जब अक्सर सफलता और सम्मान को पद, शक्ति या धन से जोड़ा जाता है, तब पूर्व IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू की कहानी एक अलग ही मिसाल पेश करती है। 88 वर्ष की उम्र में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है—और वजह है उनका वह काम, जो न किसी पद के लिए था, न किसी प्रचार के लिए, बल्कि सिर्फ समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना से जुड़ा हुआ था।

भारत सरकार द्वारा घोषित पद्मश्री पुरस्कार सूची में इंदरजीत सिंह सिद्धू का नाम शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि सच्ची सेवा कभी अनदेखी नहीं रहती।

कौन हैं इंदरजीत सिंह सिद्धू?

इंदरजीत सिंह सिद्धू 1964 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और वर्ष 1996 में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के पद से सेवानिवृत्त हुए। आमतौर पर सेवानिवृत्ति के बाद लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, लेकिन सिद्धू ने समाज के लिए एक बिल्कुल अलग रास्ता अपनाया।

सेवानिवृत्ति के बाद शुरू हुई असली यात्रा

सेवानिवृत्ति के बाद चंडीगढ़ में रहते हुए सिद्धू ने देखा कि उनके इलाके में सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं है। पहले उन्होंने स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी दी, लेकिन जब अपेक्षित समाधान नहीं मिला, तो उन्होंने खुद ही सफाई की जिम्मेदारी उठा ली।

हर सुबह तड़के उठकर वे झाड़ू लेकर सड़कों पर निकल पड़ते हैं, कचरा उठाते हैं और उसे सही जगह तक पहुंचाते हैं। यह काम वे पिछले कई वर्षों से लगातार कर रहे हैं—बिना किसी सरकारी निर्देश, वेतन या मान्यता की उम्मीद के।

“सफाई में कोई छोटा काम नहीं होता”

इंदरजीत सिंह सिद्धू का मानना है कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कई बार कहा है कि सफाई के काम में कोई अपमान नहीं होता। यही सोच उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।

उनकी सादगी और समर्पण ने धीरे-धीरे लोगों का ध्यान खींचा। स्थानीय लोगों ने उनके वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसके बाद उनकी पहचान “ब्रोम वॉरियर” यानी झाड़ू वाले योद्धा के रूप में होने लगी।

राष्ट्रीय पहचान और पद्मश्री सम्मान

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और उनकी निस्वार्थ सेवा की कहानी आखिरकार राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। सरकार ने उनकी सामाजिक सेवा और प्रेरणादायक योगदान को देखते हुए उन्हें पद्मश्री सम्मान देने का फैसला किया।

88 वर्ष की उम्र में यह सम्मान न सिर्फ उनकी मेहनत का फल है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सेवा और जिम्मेदारी की कोई उम्र नहीं होती।

समाज के लिए एक बड़ा संदेश

इंदरजीत सिंह सिद्धू की कहानी आज की पीढ़ी के लिए एक मजबूत संदेश है। उन्होंने साबित किया कि बदलाव के लिए बड़े मंच या सत्ता की जरूरत नहीं होती—सिर्फ नीयत और निरंतर प्रयास काफी हैं।

उनका जीवन यह सिखाता है कि एक व्यक्ति भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है, अगर वह अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाए।

निष्कर्ष

पूर्व IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू को मिला पद्मश्री सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन तमाम “अनसुने नायकों” को सम्मान देने जैसा है, जो बिना किसी पहचान की उम्मीद के समाज के लिए काम करते हैं। उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर रहेगी।

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