नई दिल्ली/कोलकाता:
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। SIR प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं और शिकायतों को लेकर आयोग जल्द ही एक अहम समीक्षा बैठक करने जा रहा है। इस बैठक में यदि यह साबित हुआ कि किसी स्तर पर जानबूझकर गलतियां की गई हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक में Electoral Registration Officer (ERO) और Assistant ERO (AERO) की भूमिका पर विशेष रूप से नजर रखी जाएगी। आयोग यह जानने की कोशिश करेगा कि क्या दस्तावेजों की जांच और अपलोडिंग प्रक्रिया में जानबूझकर लापरवाही बरती गई।
दस्तावेज अपलोड न होने से बढ़ी समस्या
SIR प्रक्रिया के दौरान कई मामलों में यह शिकायत सामने आई है कि सुनवाई के समय मतदाताओं द्वारा जमा किए गए आवश्यक दस्तावेज — जैसे पहचान पत्र, पासपोर्ट या अन्य प्रमाण — ऑनलाइन सिस्टम में सही तरीके से दर्ज नहीं किए गए। इससे न केवल मतदाताओं को परेशानी हुई, बल्कि पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे।
चुनाव आयोग को विशेष पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट में संकेत मिला है कि कुछ मामलों में ये गलतियां तकनीकी नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर की लापरवाही या उदासीनता का नतीजा हो सकती हैं।
समीक्षा बैठक में क्या होगा तय
बैठक में आयोग SIR की प्रगति, जिला-स्तरीय कामकाज, लंबित मामलों और शिकायतों की संख्या पर विस्तार से चर्चा करेगा। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी तो नहीं की।
यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी अधिकारी ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया है या मतदाता के अधिकारों को प्रभावित किया है, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई, स्थानांतरण या अन्य अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
राजनीतिक माहौल भी गरम
SIR को लेकर राज्य में राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं, सत्तारूढ़ दल का कहना है कि पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसे पारदर्शी तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे समय में चुनाव आयोग की यह सक्रियता बेहद अहम है, क्योंकि इससे आम लोगों का भरोसा चुनावी व्यवस्था पर बना रह सकता है।
आयोग का स्पष्ट संदेश
चुनाव आयोग पहले ही संकेत दे चुका है कि मतदाता सूची से जुड़ा कोई भी काम हल्के में नहीं लिया जाएगा। आयोग का साफ कहना है कि हर पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में रहना चाहिए और किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब सभी की नजरें इस समीक्षा बैठक के नतीजों पर टिकी हैं। देखना होगा कि आयोग इस मामले में कितना सख्त कदम उठाता है और SIR प्रक्रिया को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है।