म्यांमार में भूकंप के झटके, कोलकाता और दक्षिण बंगाल में भी महसूस, भय का माहौल

कोलकाता / दिल्ली:
3 फरवरी 2026 की शाम को पूर्वी भारत और पड़ोसी देशों में भूकंप की हलचल ने आम लोगों को डर के बीच झकझोर दिया। म्यांमार के पास रिक्टर पैमाने पर लगभग 6.0 तीव्रता वाले भूकंप के कारण न केवल वहां, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता, दक्षिण बंगाल और पड़ोसी बांग्लादेश के कई हिस्सों में झटके महसूस किए गए। उक्त झटके लोगों के घरों और इमारतों को कुछ सेकेंड के लिए हिला दिया, जिससे रात के समय कई लोग घरों से बाहर भागने को मजबूर हुए।

भूकंप की स्थिति और सेंसर डेटा

भूकंप मंगलवार रात लगभग 9:05 बजे के आसपास म्यांमार में दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर) म्यांमार के राकाइन राज्य के पास माना जा रहा है और इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी, जिससे कंपन की लहरें काफी दूरी तक फैल सकीं।

भूकंप इतना शक्तिशाली था कि झटके 10–15 सेकंड तक महसूस किए गए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक शैलो (उपरी सतह) भूकंप था, जिसकी वजह से कंपन अधिक व्यापक रूप से फैलता है।

पश्चिम बंगाल में प्रभाव

कोलकाता और दक्षिण बंगाल के विभिन्न इलाकों में रात के समय अचानक जमीन और इमारतें हल्की से मध्यम कंपन के साथ हिलने लगीं। कई लोगों ने बताया कि पास के फैन, लाइट फिटिंग और फर्नीचर हिलते हुए नजर आए, जिसके बाद भय और चिंता की स्थिति पैदा हो गयी।

कई निवासी अपने घरों से तेजी से बाहर निकले और खुले स्थानों पर खड़े होकर निवेशों की जानकारी लेने लगे। कुछ लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर भी साझा की।

बांग्लादेश और आसपास के देशों में झटके

भूकंप के झटके केवल भारत तक ही सीमित नहीं रहे। बांग्लादेश के कई हिस्सों में भी कंपन महसूस किया गया, जिससे वहाँ के लोगों के बीच भी हड़कंप मच गया। हालांकि, रात में किसी भी तरह की गंभीर क्षति या हताहत होने की रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल राज्य प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने फिलहाल किसी बड़े नुकसान या इमरजेंसी की खबर नहीं दी है। उन्होंने जनता को शांत रहने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की सलाह दी है। स्थानीय जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

भूकंप क्यों महसूस हुआ?

भूकंप म्यांमार एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में संधिस्त (सिस्मिक) गतिविधि सामान्यतः अधिक पाई जाती है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से फॉल्ट लाइनों और तटीय प्लेट जंक्शनों के करीब है, जिसके कारण समय-समय पर भूकंपीय हलचल देखी जाती है। इससे उत्पन्न झटके कभी-कभी पड़ोसी देशों तक महसूस किये जाते हैं।

इससे पहले भी मार्च 2025 में म्यांमार में करीब 7.7 तीव्रता वाला भूकंप आया था, जिसने भारी नुकसान किया था और पड़ोसी देशों में भी उसकी अनुभूति हुई थी।

लोगों की प्रतिक्रियाएँ

प्रभावित इलाकों के निवासियों का कहना है कि झटके अचानक और अप्रत्याशित रूप से महसूस हुए, जिससे शुरू में समझ में नहीं आया कि क्या हो रहा है। कई लोगों ने बताया कि वे घर के अंदर बैठे थे तभी जमीन हल्की-सी हिली, जिसके बाद वे डर के कारण घरों से बाहर निकल आए।

अब आगे क्या?

अभी तक इस भूकंप से किसी भी बुनियादी ढांचे को नुकसान या किसी तरह के घायल होने की सूचना नहीं मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थितियों में सावधानी आवश्यक है और लोगों को सुरक्षित स्थान पर रहना चाहिए। राजकीय प्रशासन और स्थानीय एजेंसियाँ संभावित बाद के झटकों के लिए भी तैयार हैं।

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