कोलकाता/गोवा: भारत में रेल मार्ग सिर्फ लोगों को नहीं जोड़ रहे — बल्कि, हालिया शोध के अनुसार कुछ बिषैध साँप, विशेषकर पश्चिमी घाट के ‘किंग कोबरा’ भी इन पटरियों पर सफ़र कर रहे हैं। नए वैज्ञानिक अध्ययन से यह तथ्य सामने आया है कि राह चलते या वन क्षेत्र में घूमते समय रेल के रास्ते साँप ट्रेन के भीतर या उसके आस-पास दिखे हैं, जिससे न सिर्फ मनुष्यों की सुरक्षा, बल्कि साँपों के जीवन पे भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
अनजाने में ट्रेन ‘ट्रांज़िट सिस्टम’
किंग कोबरा प्रकृति में सबसे लंबे विषधारी साँपों में से एक है और आमतौर पर भारत के पश्चिमी घाट के घने जंगलों में रहा करता है। लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार पिछले 22 वर्षों के रेसक्यू रिकॉर्ड और स्थानीय रिपोर्टों का विश्लेषण करने पर पता चला है कि गोवा के आसपास रेल मार्गों और ट्रेन के आसपास 47 संभावित घटनाएँ दर्ज हुई हैं जहाँ साँप पाए गए — जिनमें से कई स्थान उनके स्वाभाविक आवासों से काफी दूर थे।
यह अध्ययन इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि रेल लाइनों से जुड़े इलाके कई बार पश्चिमी घाट के आदर्श आवासों से अलग वातावरण वाले होते हैं, जहाँ न तो पर्याप्त भोजन उपलब्ध होता है, न ही स्थिर साया या छाँव। फिर भी ऐसे कई रिकॉर्ड्स हैं जहाँ साँप इन कम-उपयुक्त क्षेत्रों में भी पाए गए।
कैसे ट्रेन साँपों को ले जा सकती है?
शोधकर्ताओं का मानना है कि किंग कोबरा जैसे साँप खोज, भोजन या आश्रय की तलाश में ट्रेन के नज़दीक आने का प्रयास करते हैं। कभी-कभी वे मालगाड़ियों के बोगियों के नीचे या कोनों में फ़िसल जाते हैं, और रेल की गति के कारण बिना खुद महसूस किए कई किलोमीटर तक चलता हुआ दूसरे स्थान पर पहुँच जाते हैं।
हालाँकि प्रत्यक्ष रूप से यह साबित नहीं हुआ है कि कोबरा सचमुच “ट्रेन से सफ़र करता” है, लेकिन विश्लेषण यह संकेत देता है कि रेल नेटवर्क अनजाने में सर्पों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर दूर स्थानों तक पहुँचा सकते हैं। इससे साँपों की जैव विविधता, उनके अस्तित्व और जीवित रहने की क्षमता पर भी गंभीर असर हो सकता है, क्योंकि वे ऐसे वातावरण में पहुँच जाते हैं जहाँ उनका जीवन कठिन हो सकता है।
इंसानों और साँपों के लिए जोखिम
यह स्थिति न केवल साँपों के जीवन के लिए चिंताजनक है, बल्कि मनुष्यों के लिए भी जोखिम भरी साबित हो सकती है। ट्रेन, स्टेशन या उसके आस-पास साँपों के अचानक दिखाई देने से यात्रियों, रेलकर्मियों और स्थानीय लोगों में घबराहट या भय की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। किंग कोबरा अत्यधिक विषैध साँपों में से एक है, और इसके काटने से जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है यदि तुरंत इलाज न मिले।
साँप अक्सर स्थानीय लोगों और कर्मचारियों द्वारा अवांछित समझे जाते हैं, और इन मामलों में अनजाने में उनके खिलाफ हिंसा भी हो सकती है, जिससे वन्यजीव संरक्षण का लक्ष्य और भी कठिन हो जाता है।
शोधकर्ता क्या सुझाव दे रहे हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी अप्रत्याशित घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना ज़रूरी है। उनके सुझावों में शामिल हैं:
रेल मार्गों के पास जाँच-पड़ताल और निगरानी बढ़ाना
वन विभाग तथा रेल प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल
आम जनता में जागरूकता और सुरक्षित व्यवहार के बारे में जानकारी फैलाना
साँपों को सुरक्षित ढंग से पकड़ने और उनके प्राकृतिक आवासों में पुनः रिलीज़ करने के उपायों को सुदृढ़ बनाना
यह अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि समान रूप से लोगों और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है — खासकर जब इंसानी गतिविधियाँ उनके प्राकृतिक रहन-सहन के तरीकों को अप्रत्याशित रूप से बदल रही हों।