मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल में मादक पदार्थों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत मुर्शिदाबाद जिले से एक अहम कार्रवाई सामने आई है। लालगोला थाना क्षेत्र में दर्ज एक पुराने ड्रग्स मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कई करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है, क्योंकि जब्त की जा रही संपत्तियों का संबंध भारतपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक हुमायूं कबीर की बेटी के ससुराल पक्ष से जुड़ा बताया जा रहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई वर्ष 2025 में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत दर्ज एक मामले की जांच के आधार पर की जा रही है। उस समय लालगोला इलाके में एक आरोपी को मादक पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ और आगे की जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह जानकारी मिली कि आरोपी और उसके करीबी रिश्तेदार लंबे समय से नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े हुए थे।
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि संबंधित परिवार और उनके करीबी लोगों के नाम पर बड़ी संख्या में जमीन, मकान और व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं। अदालत से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने लगभग 17 संपत्तियों की पहचान की है, जिनमें आवासीय भवन, जमीन और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इन संपत्तियों का एक बड़ा हिस्सा ड्रग्स कारोबार से अर्जित धन से खरीदा गया हो सकता है। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद विधायक हुमायूं कबीर की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि इस पूरे मामले में उनका या उनके परिवार का कोई भी अवैध संबंध नहीं है। विधायक का दावा है कि उनकी बेटी के ससुराल पक्ष के सभी व्यवसाय वैध हैं और वे नियमित रूप से आयकर तथा अन्य करों का भुगतान करते हैं।
हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए इस मामले को उछाला जा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर कोई दोषी है तो कानून उसे सजा दे, लेकिन बिना ठोस सबूत के परिवार को घसीटना गलत है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वह इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देंगे।
वहीं पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और अदालत के आदेश के अनुसार की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव या पक्षपात नहीं है। जांच में जो भी तथ्य सामने आए हैं, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है और आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
इस घटना के बाद मुर्शिदाबाद जिले में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। हालांकि प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि राज्य में मादक पदार्थों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए सख्त कदम उठाए जाते रहेंगे और कानून से ऊपर किसी को भी नहीं माना जाएगा।