नई दिल्ली — एक आम ग्राहक के लिए सुरक्षित माना जाने वाला बैंक लॉकर अब विवादों के केंद्र में आ गया है। राजधानी के एक प्रमुख बैंक की शाखा में रखे गए लॉकर से एक महिला के दशों लाख रुपये मूल्य के गहने गायब मिलने का दावा सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया है। इस घटना पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, वहीं बैंक की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
घटना के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला वर्षों से उसी बैंक में अपने गहने सुरक्षित रख रही थीं। हाल ही में उन्होंने तय प्रक्रिया के तहत अपना लॉकर खोला, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से देखा कि अंदर कीमती सोना और आभूषणों की एक बड़ी संख्या गायब है। महिला का दावा है कि उन्होंने यह गहने कई साल पहले सुरक्षित रखने के लिए उसी लॉकर में डाल रखे थे, लेकिन अब वे उनमें नहीं मिले।
बैंक की प्रतिक्रिया
बैंक प्रबंधन ने कहा है कि वे मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और पूरी जांच कर रहे हैं। बैंक अधिकारियों के अनुसार, लॉकर में किसी प्रकार की तोड़फोड़ या बाहरी प्रभाव के संकेत नहीं मिले हैं। साथ ही, बैंक का कहना है कि लॉकर खोलते समय सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया और आवश्यक कर्मचारियों की उपस्थिति में ही लॉकर खोला गया।
बैंक ने यह भी कहा कि वे सीसीटीवी फुटेज और लॉकर से जुड़ी सभी रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना कैसे घटी और कहीं किसी प्रकार की लापरवाही तो नहीं हुई।
पुलिस जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारी हैं कि वे CCTV कैमरों की फुटेज, लॉकर खोलने के समय की प्रतीक सूची, कर्मचारियों के बयान और लॉकर तक पहुँचने वाले अन्य लोगों की जांच कर रहे हैं। आवश्यक होने पर संदिग्धों से पूछताछ की संभावना भी जताई जा रही है।
क्या बैंक जिम्मेदार?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या बैंक इस नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है और क्या ग्राहकों को इसका मुआवजा मिलेगा?
इसके लिए यह समझना आवश्यक है कि बैंक लॉकर एक सुरक्षित भंडारण सेवा प्रदान करते हैं। इसमें बैंक सिर्फ एक सुरक्षित स्थान प्रदान करता है; इसके भीतर रखी सामग्री की वास्तविक स्वामित्व बैंक का नहीं होता। इसलिए, यदि सामान चोरी हो जाता है तो सीधे तौर पर बैंक को दोषी मानना सरल नहीं होता।
भारत में बैंकिंग मामलों को नियंत्रित करने वाला संस्थान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इस प्रकार के मामलों पर दिशा-निर्देश जारी करता है। RBI के नियमों के अनुसार यदि यह सिद्ध होता है कि लॉकर में रखी वस्तु बैंक की लापरवाही, सुरक्षा की कमी या कर्मचारियों की गलत हरकत के कारण गायब हुई है, तो बैंक को सीमित क्षतिपूर्ति देनी पड़ सकती है।
हालाँकि RBI के दिशा-निर्देशों के तहत बैंक को अधिकतम लॉकर की वार्षिक किराया राशि का 100 गुना ही मुआवजे के रूप में देना होता है। इसका अर्थ है कि यदि किसी लॉकर का वार्षिक किराया ₹5,000 है, तो बैंक केवल ₹5,00,000 तक ही ग्राहक को भुगतान कर सकता है — चाहे लॉकर में रखी वस्तुओं की वास्तविक कीमत इससे कहीं अधिक क्यों न हो।
विशेषज्ञों की सलाह
वित्त विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में ग्राहक को हमेशा सावधान रहना चाहिए। लॉकर में रखी वस्तुओं की विस्तृत सूची, क्रय रसीदें और वस्तुओं के स्पष्ट चित्र अपने पास सुरक्षित रखना चाहिए। बड़े मूल्य के आभूषणों के लिए अलग से बीमा कराना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
इसके अलावा, यदि जांच में यह पता चलता है कि बैंक सुरक्षा व्यवस्था में चूक या लापरवाही बरत रहा था, तो ग्राहक बैंकिंग लोकपाल या उपभोक्ता फोरम में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
निष्कर्ष
जहाँ एक ओर पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है, वहीं बैंक अपनी सुरक्षा व्यवस्था की सफ़ाई दे रहा है। अभी तक किसी भी पक्ष ने स्पष्ट नुकसान या गिरवी रखी सामग्री वापस मिलने की पुष्टि नहीं की है। इस मामले से बैंकिंग सुरक्षा और लॉकर सेवा की विश्वसनीयता पर फिर से सार्वजनिक चर्चा तेज हो गयी है।
जैसे ही जांच आगे बढ़ेगी और तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि इस प्रकार की घटना से बचने के लिए ग्राहकों और बैंकों दोनों को क्या कदम उठाने चाहिए।