देश में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। सरकार ने Natural Gas (Supply Regulation) Order, 2026 जारी कर उत्पादन, वितरण और आपूर्ति को नियंत्रित करने का अधिकार अपने हाथ में ले लिया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सीमित गैस संसाधनों को प्राथमिकता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में बांटना है ताकि आम लोगों की जरूरतों पर कोई असर न पड़े। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपयोग और आवश्यक सेवाओं को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाएगी।
घरेलू गैस और CNG को सबसे ज्यादा प्राथमिकता
नई नीति के तहत पाइपलाइन से घरों में पहुंचने वाली PNG (Piped Natural Gas) और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG की आपूर्ति पूरी तरह जारी रखने की कोशिश की जाएगी। सरकार का कहना है कि यदि गैस की कमी भी होती है तो इन क्षेत्रों को 100 प्रतिशत आपूर्ति दी जाएगी, ताकि आम लोगों की रसोई और परिवहन व्यवस्था प्रभावित न हो।
उद्योगों को सीमित मात्रा में गैस
हालांकि कई औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति कम की जा सकती है। नई व्यवस्था के अनुसार विभिन्न उद्योगों को उनकी औसत जरूरत के आधार पर निर्धारित हिस्से के रूप में गैस दी जाएगी।
चाय उद्योग को लगभग 80 प्रतिशत गैस देने की योजना है।
उर्वरक (फर्टिलाइज़र) बनाने वाली कंपनियों को करीब 70 प्रतिशत गैस दी जाएगी।
तेल रिफाइनरियों को लगभग 65 प्रतिशत गैस मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उद्योगों पर कुछ दबाव पड़ सकता है, क्योंकि कई उत्पादन प्रक्रियाएं प्राकृतिक गैस पर निर्भर हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से एलएनजी (LNG) की आपूर्ति में बाधा आने का खतरा बताया जा रहा है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर असर पड़ सकता है।
भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है। इसी वजह से सरकार ने पहले से तैयारी करते हुए गैस के वितरण के लिए प्राथमिकता आधारित व्यवस्था लागू की है।
उद्योग जगत में बढ़ी चिंता
नई नीति के बाद उद्योग जगत के कुछ वर्गों में चिंता भी बढ़ गई है। गैस आपूर्ति कम होने की स्थिति में उत्पादन लागत बढ़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि सरकार का कहना है कि आम लोगों को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और घरेलू जरूरतों को हर हाल में सुरक्षित रखा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय हालात और ऊर्जा बाजार की स्थिति के आधार पर सरकार को और भी फैसले लेने पड़ सकते हैं। फिलहाल सरकार की कोशिश है कि सीमित संसाधनों के बीच देश में गैस की उपलब्धता को संतुलित तरीके से बनाए रखा जाए।