कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुए लिफ्ट हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना में एक व्यक्ति की मौत के बाद अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। रिपोर्ट में जिस तरह की चोटों का उल्लेख किया गया है, उसने इस हादसे को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक की पहचान अरूप बनर्जी के रूप में हुई है, जो अपने बीमार बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल लेकर आए थे। जानकारी के अनुसार, वह अपने परिवार के साथ अस्पताल के ट्रॉमा केयर बिल्डिंग की लिफ्ट में सवार हुए थे, तभी यह हादसा हुआ। प्रारंभिक तौर पर इसे एक साधारण तकनीकी खराबी माना जा रहा था, लेकिन अब सामने आए तथ्यों ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, अरूप बनर्जी के शरीर पर कुल 25 से अधिक गंभीर चोटों के निशान पाए गए। उनके सीने पर इतना दबाव पड़ा कि हृदय, फेफड़े और लीवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों को भारी नुकसान पहुंचा। इसके अलावा, उनकी पसलियां टूट गई थीं और हाथ-पैर में भी कई जगह फ्रैक्चर पाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चोटें किसी बड़े झटके या भारी दबाव की स्थिति में ही संभव हैं।
इस खुलासे के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर एक अस्पताल की लिफ्ट में ऐसी भयावह स्थिति कैसे पैदा हो सकती है। क्या लिफ्ट अचानक गिर गई थी, या उसमें कोई गंभीर तकनीकी खराबी थी? क्या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था? ये सभी सवाल अब जांच के केंद्र में हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लिफ्ट अचानक झटके के साथ नीचे की ओर खिसक गई और कुछ समय के लिए बीच में अटक गई। अंदर फंसे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि काफी देर तक राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इसी दौरान अरूप बनर्जी को गंभीर चोटें आईं।
मृतक के परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समय पर मदद मिलती तो शायद जान बचाई जा सकती थी। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित लिफ्ट में पहले भी तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें सामने आ चुकी थीं। यदि यह सही है, तो यह स्पष्ट रूप से रखरखाव में लापरवाही को दर्शाता है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे की असली वजह क्या थी। लिफ्ट के रखरखाव से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इस बीच, राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्ष ने इसे प्रशासनिक विफलता करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है, वहीं सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल जैसी जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की चूक बेहद खतरनाक हो सकती है। रोजाना हजारों मरीज और उनके परिजन इन सुविधाओं का उपयोग करते हैं, ऐसे में लिफ्ट जैसी बुनियादी सुविधा का सुरक्षित और सुचारू होना बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर, आरजी कर अस्पताल का यह लिफ्ट हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम में संभावित खामियों की ओर इशारा करता है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आई भयावह सच्चाई ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। अब सभी की नजर जांच पर टिकी है, ताकि यह पता चल सके कि आखिर इस दर्दनाक मौत के पीछे जिम्मेदार कौन है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।