सिलीगुड़ी, 10 दिसंबर — हाल के दिनों में बाहर से आए कुछ व्यापारी और मजदूरों के सिलीगुड़ी छोड़कर जाने के बाद शहर में नई तरह की चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय निवासियों के एक वर्ग का कहना है कि इस बदलाव से उनके लिए कुछ राहत की स्थिति बनी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाहरी क्षेत्रों से आने वाले कई लोग आर्थिक सामर्थ्य का उपयोग कर सिलीगुड़ी और उसके आसपास के इलाकों में जमीन, कारोबार और रोज़गार के अवसरों पर कब्ज़ा जमा रहे थे। इससे लंबे समय से यहाँ रहने वाले पुराने निवासी खुद को पीछे छूटा हुआ महसूस कर रहे थे। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “बाहरी लोग पैसे का दबदबा दिखाकर हमारी जगह ले रहे थे। हम सालों से यहाँ रहकर भी बहुत-सी चीज़ों में कुछ कर नहीं पा रहे थे।”
जानकारी के अनुसार, हाल ही में कागज़ात और कुछ प्रशासनिक नियमों में कठिनाइयों के कारण बाहरी लोगों का एक समूह शहर छोड़ने के लिए बाध्य हो गया। स्थानीय निवासियों का मानना है कि इससे उन्हें अपने व्यवसाय, रोज़गार और जमीन पर फिर से नियंत्रण पाने का अवसर मिल सकता है।
इधर, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बाहरी लोगों की उपस्थिति प्रतिस्पर्धा बढ़ाती है, लेकिन वही बाज़ार और रोजगार पर भी असर डालती है। ऐसे में इस बदलाव का लंबी अवधि में क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन अभी करना मुश्किल है।
शहर में इस विषय पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। फिर भी स्थानीय निवासियों का एक बड़ा हिस्सा वर्तमान स्थिति को अपने लिए सकारात्मक और राहतभरी मान रहा है। आने वाले समय में इस परिवर्तन का सिलीगुड़ी की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर क्या असर होगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।