मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के तीन जिलों में कार्यरत पांच चुनावी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है।
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के दौरान सामने आई गंभीर लापरवाहियों और नियमों के उल्लंघन के आरोपों के आधार पर की गई है। आरोप है कि मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया में उचित सत्यापन नहीं किया गया और कई मामलों में निर्धारित दिशानिर्देशों की अनदेखी की गई।
चुनाव आयोग ने संबंधित जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि मामले की तुरंत जांच कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए। आयोग का साफ कहना है कि लोकतंत्र की बुनियाद माने जाने वाली मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल के महीनों में मतदाता सूची से जुड़ी तकनीकी त्रुटियों में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन जिन मामलों में गंभीर प्रशासनिक चूक सामने आई है, वहां सख्त कार्रवाई आवश्यक है। इसी कारण FIR दर्ज करने का निर्णय लिया गया है।
इस निर्देश के बाद राज्य प्रशासन में भी हलचल तेज हो गई है। संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है और आंतरिक जांच की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है।
राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज है। कई राजनीतिक दलों का मानना है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, मतदाता सूची संशोधन जैसे संवेदनशील विषय पर चुनाव आयोग की यह सख्त पहल राज्य में चुनावी प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने का संकेत देती है।