SIR विवाद में बड़ा कदम — ‘अमानवीय व्यवहार’ के आरोप पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहा विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने वाला है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया के दौरान आम लोगों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। नवान्न सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इस मुद्दे पर जल्द ही कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकती है।

मुख्यमंत्री का आरोप है कि SIR के नाम पर राज्य के कई इलाकों में आम नागरिकों, विशेष रूप से बुजुर्गों, गरीबों और सीमांत वर्ग के लोगों को परेशान किया जा रहा है। बार-बार दस्तावेज़ दिखाने का दबाव, भ्रमित करने वाली सूचनाएं और डर का माहौल बनाकर लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है।

राज्य सरकार का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करना आवश्यक है, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, मानवीय और संविधानसम्मत होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक का नाम बिना ठोस कारण के मतदाता सूची से हटाया जाना स्वीकार्य नहीं है। इसी कारण राज्य सरकार इस पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाने जा रही है।

इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि केंद्र के निर्देशों के तहत अपनाई जा रही SIR प्रक्रिया से आम लोगों में डर और असमंजस फैल रहा है। वहीं विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं, हालांकि कई नेताओं ने भी आम जनता की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचता है, तो SIR की वैधानिकता, प्रक्रिया और मानवीय पहलुओं पर महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आ सकती है। इससे भविष्य में देशभर में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, SIR को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह कदम राज्य और केंद्र के बीच टकराव को और तेज कर सकता है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के रुख और आने वाले कानूनी घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

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