बीरभूम: आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बीरभूम में आयोजित एक विशाल जनसभा से सियासी माहौल को और गर्म कर दिया। अपने संबोधन में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राज्य में “एंटी-बंगाली ताकतों को हर बूथ पर राजनीतिक रूप से पराजित किया जाएगा।”
अभिषेक बनर्जी ने अपने भाषण में कहा कि पिछले कुछ वर्षों से बाहरी शक्तियां बंगाल की संस्कृति, भाषा और आत्मसम्मान पर हमला कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ता का दुरुपयोग कर राज्य को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन बंगाल की जनता इन साजिशों को कभी सफल नहीं होने देगी।
सभा के दौरान उन्होंने बीरभूम जिले की राजनीतिक भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। अभिषेक ने कहा कि बीरभूम हमेशा तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है और आगामी चुनाव में भी यहां से पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिलेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे बूथ स्तर पर संगठन को और मजबूत करें और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाएं।
अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य का बकाया पैसा रोका जा रहा है, जिससे विकास कार्यों में बाधा पैदा हो रही है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीबों, महिलाओं और किसानों के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता अब सब समझ चुकी है। आने वाले चुनाव में लोग लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगे।
अभिषेक बनर्जी के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव से पहले भावनात्मक मुद्दों को हवा दे रही है, जबकि तृणमूल समर्थकों का दावा है कि यह भाषण पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए नई ऊर्जा का स्रोत बनेगा।
कुल मिलाकर, बीरभूम की इस सभा से यह साफ हो गया है कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल का राजनीतिक तापमान और अधिक बढ़ने वाला है।